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बिहार के छात्रों के लिए खुशखबरी: सरकार उठाएगी विदेश पढ़ाई का खर्च

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आर्थिक रूप से कमजोर और एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को अब नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप योजना के तहत विदेश में मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई के लिए सरकार मदद करेगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार के छात्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब आर्थिक रूप से कमजोर, भूमिहीन और एससी-एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं को विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा, और उनका खर्च भारत सरकार की नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप योजना (NOSS) के तहत उठाया जाएगा। यह योजना पहले बिहार में लागू नहीं थी, लेकिन केंद्रीय मंत्री और राज्य के एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान के प्रयासों के बाद अब बिहार के छात्रों के लिए भी इसे खोला गया है। इस योजना के तहत छात्रों को मास्टर्स और पीएचडी कोर्स में पढ़ाई के लिए ट्यूशन फीस, मेंटेनेंस अलाउंस, वीजा फीस, मेडिकल बीमा और एयर टिकट जैसी सुविधाएं सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह योजना विशेष रूप से उन छात्रों के लिए लाभकारी है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके पास विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए संसाधन नहीं हैं। अब छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी चिंता के बिना आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत हर साल लगभग 125 छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिनमें से 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आवेदन करने वाले छात्रों की अधिकतम पारिवारिक आय 8 लाख रुपये तक होनी चाहिए और उनकी उम्र 35 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए।

छात्र इस योजना के तहत केवल मास्टर्स और पीएचडी कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं, बैचलर डिग्री शामिल नहीं है। इसके लिए आवेदक को कम से कम 60% अंकों के साथ शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होगी। आवेदन करने के लिए छात्रों के पास किसी विदेशी यूनिवर्सिटी से एडमिशन का ऑफर होना आवश्यक है, खासकर QS वर्ल्ड रैंकिंग की टॉप 500 यूनिवर्सिटी से। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल https://nosmsje.gov.in⁠� के माध्यम से होगी।

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आवेदन करने से पहले छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि सभी दस्तावेज सही ढंग से अपलोड किए गए हों। इनमें आधार कार्ड, सभी सेमेस्टर की मार्कशीट और आय प्रमाण पत्र शामिल हैं। एक परिवार से अधिकतम दो ही बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, जिन्होंने पहले किसी सरकारी स्कॉलरशिप के तहत विदेश में पढ़ाई की है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

चयनित छात्रों को स्कॉलरशिप के तहत ट्यूशन फीस, मेंटेनेंस अलाउंस, वीजा फीस, मेडिकल बीमा और एयर टिकट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। लेकिन कुछ नियम और शर्तें भी लागू हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को 30 दिन के भीतर भारत लौटना होगा और कम से कम एक साल देश में रहना होगा। यदि कोई छात्र नियमों का उल्लंघन करता है या पढ़ाई बीच में छोड़ता है, तो उसे पूरी स्कॉलरशिप राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी।

इस योजना से बिहार के छात्रों के सपनों को पंख लगने वाले हैं। पहले छात्र बिहार से बाहर जाकर उच्च शिक्षा लेने के लिए परेशान रहते थे और आर्थिक बोझ के कारण विदेश में पढ़ाई करना संभव नहीं हो पाता था। अब उन्हें न केवल आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि विदेश में पढ़ाई के लिए सारी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी।

योजना के तहत छात्र-छात्राओं को विदेशी यूनिवर्सिटी से एडमिशन लेने के बाद स्कॉलरशिप का लाभ मिलेगा। इसमें ट्यूशन फीस का पूरा भुगतान, मेंटेनेंस अलाउंस और मेडिकल बीमा शामिल है। इसके अलावा छात्रों के लिए एयर टिकट की सुविधा भी उपलब्ध होगी। सरकार इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर रही है।

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मंत्री लखेंद्र पासवान ने बताया कि यह योजना बिहार के छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगी। अब छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए किसी डर या झंझट का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस योजना के जरिए छात्र अपने ज्ञान और कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा सकते हैं और अपने करियर में नई ऊँचाइयाँ हासिल कर सकते हैं।

विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को अपनी पूरी तैयारी के साथ दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे। छात्र सुनिश्चित करें कि उनकी मार्कशीट, आय प्रमाण पत्र और एडमिशन ऑफर सही और मान्य हों। योजना का उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है ताकि बिहार के प्रतिभाशाली और मेधावी छात्र वैश्विक मंच पर अपने कौशल का प्रदर्शन कर सकें।

इस योजना के लागू होने से बिहार के भूमिहीन मजदूर, पारंपरिक कारीगर, घुमंतू/अर्ध-घुमंतू जाति और एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को अब विदेश में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। योजना में टॉप 500 QS वर्ल्ड रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी से एडमिशन होना अनिवार्य है और आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी।

यह योजना बिहार के छात्रों के लिए न केवल शिक्षा के अवसर बढ़ाएगी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करेगी। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति और सुविधाएं छात्रों के लिए विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करना अब आसान और सुरक्षित बनाएंगी।

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